पर्यावरण प्रहरी : पेड़ बचाने को घर का नक्शा बदल डाला
🌳 अनुराग शुक्ला
हमारी पृथ्वी तभी सुरक्षित रह सकती है जब पर्यावरण का संरक्षण होगा। अंधाधुंध पेड़ों की कटाई और बढ़ते प्रदूषण ने न सिर्फ जीव-जंतुओं बल्कि संपूर्ण मानव जाति को प्रभावित किया है। ऐसे में कुछ लोग हैं जो पर्यावरण को बचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। बरेली के पर्यावरण रक्षकों ने भवन निर्माण में आड़े आ रहे पेड़ों को नक्शे में बदलाव कर न सिर्फ बचाया बल्कि उन्हें बढ़ने का मौका भी दिया।
आम के पेड़ को न सिर्फ बचाया उसे खूबसूरत रूप भी दिया
बरेली में राजेंद्रनगर में कैलाश हॉस्पिटल में भी एक आम का पड़े है। हॉस्पिटल के मालिक डॉ. मनीष टंडन कहते हैं बताया कि हॉस्पिटल के लिए जब जमीन ली गई तो वहां छोटा सा आम का पेड़ भी था। पत्नी बरेली कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रूपाली टंडन ने कहा कि किसी कीमत पर पेड़ नहीं कटेगा। फिर पेड़ को बचाते हुए दीवार बनाई गई। बाहर से पेड़ को शीशे से कवर कर दिया गया। इससे पेड़ के बचने के साथ ही खूबसूरती भी बढ़ गई। डॉ. रूपाली ने कहा कि पर्यावरण को बचाना सभी का कर्तव्य है। आज ये पेड़ पेड़ को देखकर काफी खुशी होती है।
घर की सुंदरता बढ़ गई और पेड़ भी सुरक्षित हो गए
बरेली में मेडिकल के कारोबार से जुड़े दिलीप खटवानी का राजेंद्रनगर में घर बन रहा है। परिसर में ही दो आम के बड़े पेड़ हैँ। घर के निर्माण के समय दोनों पेड़ों को बचाने की चुनौती थी। ऐसे में आर्किटेक्ट अनुपम सक्सेना ने नक्शा बनाते समय कई तब्दीलियां की। पहली मंजिल पर छत को इस तरह से डिजाइन किया गया कि आम का तना उसमें से निकल गया। ऊपर टहनियों के लिए भी जगह छोड़ी गई। इस कवायद से न सिर्फ पेड़ों को बचा लिया गया बल्कि घर को एक नई पहचान मिल गई। अब लोग इससे प्रेरित हो रहे हैं। दिलीप के भाई दुर्गेश खटवानी ने कहा कि सभी को पर्यावरण के संरक्षण के लिए आगे आना चाहिए।
पेड़ पर पक्षियों की चहचहाहट से होती है सुबह
बरेली में सिविल लाइंस की भटनागर कॉलोनी में रहने वाले फ्लोर मिल मालिक राजेश अग्रवाल ने बताया कि उनके घर में पाम प्रजाति के पेड़ हैं। जब जमीन खरीदा तभी ये पेड़ लगे थे। घर के निर्माण के समय पेड़ के कारण परेशानी हो रही थी। लेकिन किसी कीमत पर उन्हें काटना नहीं था। ऐसे में आर्किटेक्ट अनुपम सक्सेना से मंथन करने के बाद नक्शे में थोड़ा बदलाव कर पेड़ को सुरक्षित कर लिया। अब इन पेड़ों पर तमाम पक्षी अपना घोसला बनाते हैं। चिड़ियों की चहचहाहट से सुबह होती है। बहुत अच्छा लगता है।
एक दिन नहीं, साल भर करनी पड़ेगी पर्यावरण की चिंता
बरेली के आर्किटेक्ट अनुपम सक्सेना कहते हैं, पर्यावरण दिवस किसी दिन विशेष का नहीं साल भर चर्चा का विषय होना चाहिए। हर इंसान साल में कम से कम एक पौधा जरूर लगाए और फिर दिल से उसकी हिफाजत करे। जब कहीं पेड़ कटता है तो हमें बुरा लगता है। मगर जब हम अपना घर या दुकान बनाते हैं तो पेड़ काटने से पहले एक मिनट भी नहीं सोचते। मैंने लोगों की इसी सोच को बदलने की कोशिश की है। अगर किसी जमीन पर पेड़ है तो वह हमसे पहले पेड़ का घर है, अपने घर के लिए हम उसे बेदखल कैसे कर सकते हैं। मैं घर का नक्शा ऐसे तैयार करता हूं कि पेड़ भी रहे और घर भी। हर इंसान अपने घर में एक पेड़ जरूर लगाए। ज्यादा जगह न हो तो गमले में ही लगा लें। बेहतर होगा कि हम बच्चों को पर्यावरण से जुड़ना सिखाएं। यह भी बताएं कि पौधों को बचाने के लिए हमें साल में एक दिन नहीं, साल भर तैयार रहना होगा।
हमारी पृथ्वी तभी सुरक्षित रह सकती है जब पर्यावरण का संरक्षण होगा। अंधाधुंध पेड़ों की कटाई और बढ़ते प्रदूषण ने न सिर्फ जीव-जंतुओं बल्कि संपूर्ण मानव जाति को प्रभावित किया है। ऐसे में कुछ लोग हैं जो पर्यावरण को बचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। बरेली के पर्यावरण रक्षकों ने भवन निर्माण में आड़े आ रहे पेड़ों को नक्शे में बदलाव कर न सिर्फ बचाया बल्कि उन्हें बढ़ने का मौका भी दिया।
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| फोटो : रोहित उमराव |
आम के पेड़ को न सिर्फ बचाया उसे खूबसूरत रूप भी दिया
बरेली में राजेंद्रनगर में कैलाश हॉस्पिटल में भी एक आम का पड़े है। हॉस्पिटल के मालिक डॉ. मनीष टंडन कहते हैं बताया कि हॉस्पिटल के लिए जब जमीन ली गई तो वहां छोटा सा आम का पेड़ भी था। पत्नी बरेली कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रूपाली टंडन ने कहा कि किसी कीमत पर पेड़ नहीं कटेगा। फिर पेड़ को बचाते हुए दीवार बनाई गई। बाहर से पेड़ को शीशे से कवर कर दिया गया। इससे पेड़ के बचने के साथ ही खूबसूरती भी बढ़ गई। डॉ. रूपाली ने कहा कि पर्यावरण को बचाना सभी का कर्तव्य है। आज ये पेड़ पेड़ को देखकर काफी खुशी होती है।
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| फोटो : रोहित उमराव |
घर की सुंदरता बढ़ गई और पेड़ भी सुरक्षित हो गए
बरेली में मेडिकल के कारोबार से जुड़े दिलीप खटवानी का राजेंद्रनगर में घर बन रहा है। परिसर में ही दो आम के बड़े पेड़ हैँ। घर के निर्माण के समय दोनों पेड़ों को बचाने की चुनौती थी। ऐसे में आर्किटेक्ट अनुपम सक्सेना ने नक्शा बनाते समय कई तब्दीलियां की। पहली मंजिल पर छत को इस तरह से डिजाइन किया गया कि आम का तना उसमें से निकल गया। ऊपर टहनियों के लिए भी जगह छोड़ी गई। इस कवायद से न सिर्फ पेड़ों को बचा लिया गया बल्कि घर को एक नई पहचान मिल गई। अब लोग इससे प्रेरित हो रहे हैं। दिलीप के भाई दुर्गेश खटवानी ने कहा कि सभी को पर्यावरण के संरक्षण के लिए आगे आना चाहिए।
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| फोटो : मनप्रीत |
बरेली में सिविल लाइंस की भटनागर कॉलोनी में रहने वाले फ्लोर मिल मालिक राजेश अग्रवाल ने बताया कि उनके घर में पाम प्रजाति के पेड़ हैं। जब जमीन खरीदा तभी ये पेड़ लगे थे। घर के निर्माण के समय पेड़ के कारण परेशानी हो रही थी। लेकिन किसी कीमत पर उन्हें काटना नहीं था। ऐसे में आर्किटेक्ट अनुपम सक्सेना से मंथन करने के बाद नक्शे में थोड़ा बदलाव कर पेड़ को सुरक्षित कर लिया। अब इन पेड़ों पर तमाम पक्षी अपना घोसला बनाते हैं। चिड़ियों की चहचहाहट से सुबह होती है। बहुत अच्छा लगता है।
एक दिन नहीं, साल भर करनी पड़ेगी पर्यावरण की चिंता
बरेली के आर्किटेक्ट अनुपम सक्सेना कहते हैं, पर्यावरण दिवस किसी दिन विशेष का नहीं साल भर चर्चा का विषय होना चाहिए। हर इंसान साल में कम से कम एक पौधा जरूर लगाए और फिर दिल से उसकी हिफाजत करे। जब कहीं पेड़ कटता है तो हमें बुरा लगता है। मगर जब हम अपना घर या दुकान बनाते हैं तो पेड़ काटने से पहले एक मिनट भी नहीं सोचते। मैंने लोगों की इसी सोच को बदलने की कोशिश की है। अगर किसी जमीन पर पेड़ है तो वह हमसे पहले पेड़ का घर है, अपने घर के लिए हम उसे बेदखल कैसे कर सकते हैं। मैं घर का नक्शा ऐसे तैयार करता हूं कि पेड़ भी रहे और घर भी। हर इंसान अपने घर में एक पेड़ जरूर लगाए। ज्यादा जगह न हो तो गमले में ही लगा लें। बेहतर होगा कि हम बच्चों को पर्यावरण से जुड़ना सिखाएं। यह भी बताएं कि पौधों को बचाने के लिए हमें साल में एक दिन नहीं, साल भर तैयार रहना होगा।



धन्यवाद
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