अब बेहद कम दिखते हैं मच्छरों के जानी दुश्मन मेंढक 🐸
अनुराग शुक्ला मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया जैसी मच्छर जनित बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। हर वर्ष इन बीमारियों से हजारों लोगों की मौत हो जाती है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से मच्छरों के खात्मे के लिए हर वर्ष अभियान चलाए जाते हैं। तमाम रासायनिक छिड़काव किए जाते हैं। हम घरों में क्वायल से लेकर शरीर पर लगाने वाले क्रीम के प्रयोग समेत तमाम उपाय करते हैं लेकिन दो चार दिनों की राहत के बाद मच्छर दोबारा लौटते हैं और आक्रामक होकर हमे परेशान करते हैं। मच्छरों को लेकर साफ-सफाई के लिए स्कूलों से लेकर सामाजिक संगठन जागरूकता अभियान चलाते हैं लेकिन इन सब कवायद के बाद भी न तो मच्छर कम हो रहे हैं और न ही मच्छर जनित बीमारियों का असर। आपने कभी सोचा है कि इतने उपयों के बाद भी आखिर मच्छरों की संख्या कम क्यों नहीं होती। दरअसल हम मच्छरों को खत्म करने के लिए जो रासायनिक उपाय अपना रहे हैं वे प्रभावी होने की जगह और नुकसानदायक हैं। उनसे मच्छरों की संख्या पर तो लगाम नहीं लगती उल्टा उनके प्राकृतिक दुश्मन तेजी से नष्ट हो रहे हैं। ...