Posts

Showing posts from May, 2022

अन्नदाता ! नन्ही मधुमक्खी

Image
 - अनुराग शुक्ला हमारी खूबसूरत पृथ्वी असंख्य जीवों का घर है। इसका अस्तित्व बचाए रखने में तितलियों, पतंगों, भृंग, मधुमखियों, ततैया सहित 29 प्रमुख कीट समूहों की बेहद महत्वपूर्ण भूमिका है। ये नन्हे जीव धरती की जैवविविधता को तो समृद्ध करते ही हैं, दुनिया की 87 प्रमुख खाद्य फसलों से मिलने वाले फल, सब्जियां और बीज के परागण की जिम्मेदारी भी निभाते हैं। आज बात करेंगे इन्हीं कीटों में से एक मधुमक्खी की।  धरती पर मधुमक्खियों की 20 हजार से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं। ये 2 मिलीमीटर से लेकर 4 सेंटीमीटर तक के आकार में होती हैं। फूल-पौधे और मधुमक्खियों के बीच महत्वपूर्ण संबंध है। ये सिलसिला करीब 10 करोड़ वर्ष से चल रहा है। ऐसे में दोनों के बीच सामंजस्य और परस्पर निर्भरता पृथ्वी को लगातार समृद्ध कर रही है। दरअसल हम जितने भी प्रकार की खाद्य फसलें प्रयोग करते हैं उनमें से करीब 75% बीज और फल होते हैं। प्रमुख खाद्य फसलों का उत्पादन पूर्ण या आंशिक रूप से परागण पर ही निर्भर है। परागण की इस प्रक्रिया में मधुमक्खियों का योगदान अग्रणी है।  फूल पर बैठी मधुमक्खी सिर्फ शहद के लिए रस ही नहीं जुटाती...

शहरों की चकाचौंध प्रवासी पक्षियों के लिए खतरनाक

Image
अनुराग शुक्ला आजकल शहर से लेकर कस्बे तक तेज रोशनी से चकाचौंध हो रहे हैं लेकिन प्रवासी पक्षियों पर इस प्रकाश प्रदूषण की मार पड़ रही है। सैकड़ों-हजारों किलोमीटर की यात्रा के दौरान तेज रोशनी से ये खूबसूरत #पक्षी अपना रास्ता भटक रहे हैं। ऐसे में रात में अनावश्यक लाइट के प्रयोग से बचने का हमारा साझा प्रयास इन पक्षियों को सुरक्षित उड़ने भरने में मदद करेगा। हमारे आसपास दिखने वाले पक्षियों के साथ ही कुछ ऐसे भी हैं जो भोजन, कठोर मौसम से सुरक्षा, प्रजनन, अंडे देने, चूजों की देखभाल को सैकड़ों-हजारों किमी की दूरी तय कर विभिन्न स्थानों पर आते-जाते हैं। ये पक्षी झीलों, तालाबों, आर्द्रभूमि (वेटलैंड) आदि स्थानों पर रुकते हैं। लेकिन शिकार, खत्म होते पर्यावास, नष्ट होते पानी के स्रोत और पृथ्वी की सतह पर बढ़ती रोशनी के कारण इन पक्षियों का आना लगातार कम होता जा रहा है। ऐसे में इनकी सुरक्षा और जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रत्येक वर्ष मई और अक्तूबर माह का दूसरा शनिवार विश्व प्रवासी पक्षी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष इस विशेष दिवस की थीम है ‘प्रवासी पक्षियों पर प्रकाश प्रदूषण का प्रभाव’ और नारा है ‘रात...