शहरों की चकाचौंध प्रवासी पक्षियों के लिए खतरनाक
- अनुराग शुक्ला
आजकल शहर से लेकर कस्बे तक तेज रोशनी से चकाचौंध हो रहे हैं लेकिन प्रवासी पक्षियों पर इस प्रकाश प्रदूषण की मार पड़ रही है। सैकड़ों-हजारों किलोमीटर की यात्रा के दौरान तेज रोशनी से ये खूबसूरत #पक्षी अपना रास्ता भटक रहे हैं। ऐसे में रात में अनावश्यक लाइट के प्रयोग से बचने का हमारा साझा प्रयास इन पक्षियों को सुरक्षित उड़ने भरने में मदद करेगा।
हमारे आसपास दिखने वाले पक्षियों के साथ ही कुछ ऐसे भी हैं जो भोजन, कठोर मौसम से सुरक्षा, प्रजनन, अंडे देने, चूजों की देखभाल को सैकड़ों-हजारों किमी की दूरी तय कर विभिन्न स्थानों पर आते-जाते हैं। ये पक्षी झीलों, तालाबों, आर्द्रभूमि (वेटलैंड) आदि स्थानों पर रुकते हैं। लेकिन शिकार, खत्म होते पर्यावास, नष्ट होते पानी के स्रोत और पृथ्वी की सतह पर बढ़ती रोशनी के कारण इन पक्षियों का आना लगातार कम होता जा रहा है। ऐसे में इनकी सुरक्षा और जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रत्येक वर्ष मई और अक्तूबर माह का दूसरा शनिवार विश्व प्रवासी पक्षी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष इस विशेष दिवस की थीम है ‘प्रवासी पक्षियों पर प्रकाश प्रदूषण का प्रभाव’ और नारा है ‘रात में पक्षियों के लिए रोशनी कम करें!’।
कई रिपोर्ट में दावे किए गए हैं कि पृथ्वी की सतह पर कृत्रिम रोशनी प्रति वर्ष 2% तक बढ़ रही है। कई प्रवासी पक्षी शिकारी पक्षियों से बचने के लिए रात में उड़ते हैं। कुछ तो दिन-रात अनवरत लंबी दूरी तक उड़ते हैं। उनके रास्ते में कई शहर और कस्बे पड़ते हैं। जहां तेज रोशन अधिक होती है। आसमान से रोशनी देखने पर प्रकाश के फैलाव के कारण चमक ज्यादा दिखती है। ये तेज लाइट उन्हें भ्रमित कर देती है। कई पक्षी रात की तेज रोशनी को दिन समझने की भूल भी कर बैठते हैं। उनके अनुमान लगाने का प्राकृतिक स्वभाव प्रभावित हो जाता है। इसके कारण वे तय समय पर गंतव्य तक नहीं पहुंच पाते या रास्ता भटककर विलंब से पहुंचते हैँ। इससे इनका प्रजनन प्रभावित होता है। तय समय पर वापसी में दिक्कत आती है। वहीं कई की तो मौत भी हो जाती है।
हमारे देश में ऑस्ट्रेलिया, रूस, अलास्का, यूरोप आदि स्थानों से बार हेडेड गूज, फारजिनियस पोचर्ड, ग्रेटर स्कूप, गेड वॉल, मलार्ड डक, यूरेशन वीजन, नार्दर्न पिंटेल, नार्दन शॉवलर, टर्की डक, ग्रेलागूज आदि प्रमुख रूप से प्रवास करने आते हैं। इसके अलावा उच्च हिमालयी क्षेत्र से गर्म मैदान की ओर भी कई पक्षी आते हैं।
प्रवासी पक्षी अपने गंतव्य तक जाने के लिए आश्चर्यजनक रूप से दिन में सूर्य, रात में तारों के जरिए अपना रास्ता खोजते हैं। वहीं कई पक्षी ऐसे भी हैं जो पृथ्वी के चुबंकीय क्षेत्र की मदद से अपना रास्ता पहचानते हैं। ये प्रवासी पक्षी हमारे और पारिस्थितिक तंत्र के लिए बेहद आवश्यक हैं। पक्षियों के द्वारा बीज का फैलाव एवं कीट नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए जाते हैं। इसके साथ ही इनका दिखना और चहचहाना पर्यावरण प्रेमियों के लिए किसी निधी से कम नहीं।


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