हम करेंगे प्रकृति का सम्मान तभी होगा कल्याण
🌳 अनुराग शुक्ला
पृथ्वी जैव विविधताओं की बदौलत जीवन को जीवंत बनाए हुए हैं। जंगल, वन्यजीव, कीट, खाद्यान्न, नदियां, समुद्र हमारे अस्तित्व एवं विकास के लिए आवश्यक हैं। इसी जैव संपदा के संरक्षण और संवर्धन के लिए दुनिया हर वर्ष 22 मई को विश्व जैव विविधता दिवस मनाती है। इस वर्ष का विषय रहा ‘प्रकृति में ही हमारा समाधान है’। हम प्रकृति का सम्मान करेंगे तभी हमारा अस्तित्व भी बच सकेगा।
हमारी पृथ्वी जितनी खूबसूरत है उससे कहीं ज्यादा रहस्यमयी है। आप जानकर हैरान रह जाएंगे कि अभी भी मानव पृथ्वी के अनगिनत रहस्यों तक नहीं पहुंच सका है। ये चौकाने वाला तथ्य इसलिए भी है कि हमारी उड़ान अंतरिक्ष तक है। हम न सिर्फ चांद से लेकर मंगल तक की दूरी नाप रहे हैं बल्कि वहां की जमीन तक पहुंच बनाने में सफल रहे हैं। आने वाले समय में कई अन्य ग्रहों तक हमारी पहुंच हो जाएगी। वहीं विशेषज्ञों की माने तो इनसान अभी तक धरती के पूरे भूभाग तक नहीं पहुंच पाया है।
80 प्रतिशत जैव विविधता जंगलों में रहती है
अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) के अनुसार पृथ्वी करीब आठ मिलियन प्रजातियों का घर है। इनमें से 80% जैव विविधता जंगल में रहती है। 30.7 प्रतिशत पृथ्वी की सतह वनों से ढंकी है। वर्तमान में 13 मिलियन हेक्टेयर वन हर साल नष्ट हो रहे हैं। ऐसे में वनों के साथ ही ये अनमोल जैव विविधता भी नष्ट हो रही है। अनुमानत: एक मिलियन प्रजातियों के विलुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है।
स्तनधारी प्राणी
लखीमपुर के दुधवा टाइगर रिजर्व में 100 से ज्यादा बाघ, पार्क में हाथियों की संख्या 100 से ज्यादा है जबिक टाइगर रिजर्व में 150 से अधिक है। वर्तमान में यहां 38 गैंडे, 100 से अधिक भालू, 18 हजार चीतल, 35 के करीब बारासींघा, चार हजार पाढ़ा हैं। पीलीभीत टाइगर रिजर्व में 65 से अधिक बाघ, 125 से अधिक भालू, पांच हजार हिरन हैं।
पक्षियों की उड़ान
खीरी, पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बंगाल फ्लोरिकन दिखती है। ये गंभीर खतरे की श्रेणी में है। इसके अलावा भरतीय रोलर, काला तीतर खूब दिखती हैं। बरेली, बदायूं में उत्तर प्रदेश का राजकीय पक्षी सारस भी बहुतायत दिखते हैं।
सरिसृपों की दुनिया
दुधवा की सोनारीपुर रेंज के साथ ही पीलीभीत के जंगलों में रेड कोरल सांप विशेष आकर्षण हैं। इसके अलावा करैत और गोह भी खूब दिखते हैं। खीरी में दुर्लभ दो मुहा साप होता है। अंधाधुंध शिकार के कारण ये विलुप्त होने के कगार पर है।
पेड़ पौधों का संसार
लखीमपुर खीरी के दुधवा में साल के जंगल हैं तो वहीं धरती के फूल और कटरुआ बहुतायत में मिलते हैं। पीलीभीत में असना, कुसुम के पेड़ आसानी से दिखाई दे जाते हैं। पर्यावरण विशेषज्ञ अनिल साहनी ने बताया कि बरेली के टिकरा स्थित उनके गॉडसन आर्गेनिक फार्म में बांझ, अवाकाडो, चंदन, चीड़, देवदार भी हैं। मालाबार टैमरिंड, मोटी इलायची। यहां की प्रजाति न होने के बाद भी ये फल-फूल रही हैं।
कोरोना ने दिया प्रकृति को समझने का अवसर
लखीमपुर खीरी के दुधवा टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर संजय पाठक ने बताया कि कोरोना से उपजे संकट काल में प्रकृति ने हमें उसे समझने का अवसर दिया है। इस वैश्विक महामारी के बीच हम घरों में कैद होने को मजबूर हैं। लॉकडाउन ने हमें सिखाया कि कैसे हम असीमित जरूरतों को कम कर प्रकृति के साथ ही साथ खुद को लाभ पहुंचा सकते है।
प्रदूषण कम हुआ तो दिखने लगे पहाड़
लॉकडाउन में एसी और वाहनों का प्रयोग बेहद कम हो रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो इसी का नतीजा है कि बरेली, सहारनपुर, बिजनौर जैसे शहरों से भी उत्तराखंड के पहाड़ों का दर्शन हो रहा है। साथ ही मानव दखल कम होने और शोर शांत होने से वन्यजीव सहजता से घूमते हुए दिख रहे हैं।
रोचक तथ्य
पृथ्वी के पारिस्थितिकी तंत्र में यहां मौजूद प्रत्येक प्रजाति आपना योगदान करती है। एक मिलियन जानवरों और पौधों की प्रजातियों को अब विलुप्त होने का खतरा है। यह मानव इतिहास में सबसे बड़ा नुकसान साबित होगा। उदाहरणों से समझते हैं कुछ जीवों की उपयोगिता...
इसे भी जानें
पृथ्वी पर सभी स्तनधारियों में से 60% पशुधन हैं, ज्यादातर मवेशी और सुअर हैं। 36% मानव हैं और सिर्फ 4% जंगली जानवर हैं। (स्रोत: इन्टरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर )
विशेषज्ञ बोले
वन्यजीवों के संरक्षण का प्रयास करें
बरेली रेंज के मुख्य वन संरक्षक ललित वर्मा ने कहा कि बरेली रेंज के मबरेली जोन में बहुत महत्वपूर्ण प्रजातियां मिलती हैं जिसको संरक्षित रखना अत्यंत आवश्यक है। इस जैव विविधता दिवस पर हम यह प्रयास करें की हमारे आस पास मिलने वाले दुर्लभ वन्य जीव एवं वनस्पतियों को पहचानें और उसके महत्व को जानते हुए संरक्षण का प्रयास करें ।
जैव विविधता बचाने में सहयोग दें
पीलीभीत टाइगर रिजर्व के डीएफओ नवीन खंडेलवाल ने कहा कि प्रकृति ही मानव जाति को सब कुछ देती हैं और प्रकृति की देय शक्ति उसकी जैव विविधता पर निर्भर करती है। जैव विविधता के कारण ही जीवन का संतुलन है। अनुमान के अनुसार 2050 तक पृथ्वी पर पाई जाने वाली आधी प्रजातियां विलुप्त हो जाएंगी। आएं हम सब जैव विविधता को बचा कर संतुलित प्रकृति के बनाए रखने में सहयोग दें।
पृथ्वी जैव विविधताओं की बदौलत जीवन को जीवंत बनाए हुए हैं। जंगल, वन्यजीव, कीट, खाद्यान्न, नदियां, समुद्र हमारे अस्तित्व एवं विकास के लिए आवश्यक हैं। इसी जैव संपदा के संरक्षण और संवर्धन के लिए दुनिया हर वर्ष 22 मई को विश्व जैव विविधता दिवस मनाती है। इस वर्ष का विषय रहा ‘प्रकृति में ही हमारा समाधान है’। हम प्रकृति का सम्मान करेंगे तभी हमारा अस्तित्व भी बच सकेगा।
हमारी पृथ्वी जितनी खूबसूरत है उससे कहीं ज्यादा रहस्यमयी है। आप जानकर हैरान रह जाएंगे कि अभी भी मानव पृथ्वी के अनगिनत रहस्यों तक नहीं पहुंच सका है। ये चौकाने वाला तथ्य इसलिए भी है कि हमारी उड़ान अंतरिक्ष तक है। हम न सिर्फ चांद से लेकर मंगल तक की दूरी नाप रहे हैं बल्कि वहां की जमीन तक पहुंच बनाने में सफल रहे हैं। आने वाले समय में कई अन्य ग्रहों तक हमारी पहुंच हो जाएगी। वहीं विशेषज्ञों की माने तो इनसान अभी तक धरती के पूरे भूभाग तक नहीं पहुंच पाया है।
80 प्रतिशत जैव विविधता जंगलों में रहती है
अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) के अनुसार पृथ्वी करीब आठ मिलियन प्रजातियों का घर है। इनमें से 80% जैव विविधता जंगल में रहती है। 30.7 प्रतिशत पृथ्वी की सतह वनों से ढंकी है। वर्तमान में 13 मिलियन हेक्टेयर वन हर साल नष्ट हो रहे हैं। ऐसे में वनों के साथ ही ये अनमोल जैव विविधता भी नष्ट हो रही है। अनुमानत: एक मिलियन प्रजातियों के विलुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है।
स्तनधारी प्राणी
लखीमपुर के दुधवा टाइगर रिजर्व में 100 से ज्यादा बाघ, पार्क में हाथियों की संख्या 100 से ज्यादा है जबिक टाइगर रिजर्व में 150 से अधिक है। वर्तमान में यहां 38 गैंडे, 100 से अधिक भालू, 18 हजार चीतल, 35 के करीब बारासींघा, चार हजार पाढ़ा हैं। पीलीभीत टाइगर रिजर्व में 65 से अधिक बाघ, 125 से अधिक भालू, पांच हजार हिरन हैं।
पक्षियों की उड़ान
खीरी, पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बंगाल फ्लोरिकन दिखती है। ये गंभीर खतरे की श्रेणी में है। इसके अलावा भरतीय रोलर, काला तीतर खूब दिखती हैं। बरेली, बदायूं में उत्तर प्रदेश का राजकीय पक्षी सारस भी बहुतायत दिखते हैं।
सरिसृपों की दुनिया
दुधवा की सोनारीपुर रेंज के साथ ही पीलीभीत के जंगलों में रेड कोरल सांप विशेष आकर्षण हैं। इसके अलावा करैत और गोह भी खूब दिखते हैं। खीरी में दुर्लभ दो मुहा साप होता है। अंधाधुंध शिकार के कारण ये विलुप्त होने के कगार पर है।
पेड़ पौधों का संसार
लखीमपुर खीरी के दुधवा में साल के जंगल हैं तो वहीं धरती के फूल और कटरुआ बहुतायत में मिलते हैं। पीलीभीत में असना, कुसुम के पेड़ आसानी से दिखाई दे जाते हैं। पर्यावरण विशेषज्ञ अनिल साहनी ने बताया कि बरेली के टिकरा स्थित उनके गॉडसन आर्गेनिक फार्म में बांझ, अवाकाडो, चंदन, चीड़, देवदार भी हैं। मालाबार टैमरिंड, मोटी इलायची। यहां की प्रजाति न होने के बाद भी ये फल-फूल रही हैं।
कोरोना ने दिया प्रकृति को समझने का अवसर
लखीमपुर खीरी के दुधवा टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर संजय पाठक ने बताया कि कोरोना से उपजे संकट काल में प्रकृति ने हमें उसे समझने का अवसर दिया है। इस वैश्विक महामारी के बीच हम घरों में कैद होने को मजबूर हैं। लॉकडाउन ने हमें सिखाया कि कैसे हम असीमित जरूरतों को कम कर प्रकृति के साथ ही साथ खुद को लाभ पहुंचा सकते है।
प्रदूषण कम हुआ तो दिखने लगे पहाड़
लॉकडाउन में एसी और वाहनों का प्रयोग बेहद कम हो रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो इसी का नतीजा है कि बरेली, सहारनपुर, बिजनौर जैसे शहरों से भी उत्तराखंड के पहाड़ों का दर्शन हो रहा है। साथ ही मानव दखल कम होने और शोर शांत होने से वन्यजीव सहजता से घूमते हुए दिख रहे हैं।
रोचक तथ्य
पृथ्वी के पारिस्थितिकी तंत्र में यहां मौजूद प्रत्येक प्रजाति आपना योगदान करती है। एक मिलियन जानवरों और पौधों की प्रजातियों को अब विलुप्त होने का खतरा है। यह मानव इतिहास में सबसे बड़ा नुकसान साबित होगा। उदाहरणों से समझते हैं कुछ जीवों की उपयोगिता...
- मधुमक्खी और अन्य परागण करने वाले कीड़े दुनिया भर में खाद्य उत्पादन में सुधार करते हैं इससे खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।
- हेलमेटेड हॉर्नबिल व कई दूसरे पक्षी हजारों मील उड़ते हैं और बीजों को फैलाते हैं। इस प्रक्रिया से जंगलों को समृद्ध करने के साथ ही असंख्य खाद्य स्रोत निर्मित होते हैं।
- पैंगोलिन 20,000 चींटियों और 70 मिलियन से अधिक दीमक रोज चट कर इनकी आबादी के असंतुलन को रोकता है।
- बड़ी बिल्लियां (शेर, बाघ, तेंदुए आदि) शाकाहारी जानवरों की आबादी को नियंत्रित करती हैं। साथ ही बीमार-दुर्बल जानवरों का सफाया भी कर देते हैं।
इसे भी जानें
पृथ्वी पर सभी स्तनधारियों में से 60% पशुधन हैं, ज्यादातर मवेशी और सुअर हैं। 36% मानव हैं और सिर्फ 4% जंगली जानवर हैं। (स्रोत: इन्टरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर )
विशेषज्ञ बोले
वन्यजीवों के संरक्षण का प्रयास करें
बरेली रेंज के मुख्य वन संरक्षक ललित वर्मा ने कहा कि बरेली रेंज के मबरेली जोन में बहुत महत्वपूर्ण प्रजातियां मिलती हैं जिसको संरक्षित रखना अत्यंत आवश्यक है। इस जैव विविधता दिवस पर हम यह प्रयास करें की हमारे आस पास मिलने वाले दुर्लभ वन्य जीव एवं वनस्पतियों को पहचानें और उसके महत्व को जानते हुए संरक्षण का प्रयास करें ।
जैव विविधता बचाने में सहयोग दें
पीलीभीत टाइगर रिजर्व के डीएफओ नवीन खंडेलवाल ने कहा कि प्रकृति ही मानव जाति को सब कुछ देती हैं और प्रकृति की देय शक्ति उसकी जैव विविधता पर निर्भर करती है। जैव विविधता के कारण ही जीवन का संतुलन है। अनुमान के अनुसार 2050 तक पृथ्वी पर पाई जाने वाली आधी प्रजातियां विलुप्त हो जाएंगी। आएं हम सब जैव विविधता को बचा कर संतुलित प्रकृति के बनाए रखने में सहयोग दें।


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