वेटलैंड डे : तेजी से सिकुड़ रही धरती की ‘किडनी’
अनुराग शुक्ला
हमारी जीवनदायिनी भूमि की किडनी तेजी से सिकुड़ रही है। हम बात कर रहे हैं वेटलैंड (आर्द्रभूमि) की जिसे ‘किडनीज ऑफ द लैंडस्केप’ भी कहा जाता है। दो फरवरी को वेटलैंड डे मनाया जाता है। बढ़ते शहरीकरण और कब्जों के कारण जैवविविधता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण वेटलैंड को खत्म कर रहे हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार वर्ष 1900 के बाद से अब तक 85 प्रतिशत से अधिक वेटलैंड खत्म हो चुके हैं। आइए जानते हैं क्या है वेटलैंड, कैसे हो रहे खत्म, क्यों है इनकी जरूरत और कैसे वेटलैंड को बचाया जा सकता है।
पर्यावरणविद व रांची यूनिवर्सिटी में भूविज्ञान के सहायक प्रोफेसर नीतीश प्रियदर्शी के अनुसार देश में रामसर समझौते के तहत 42 वेटलैंड संरक्षित किए जा रहे हैं। जिनका क्षेत्रफल करीब 1,081,438 हेक्टेयर है। हालांकि इसके अलावा भी हजारों वेटलैंड्स हैं जो जैविक और आर्थिक रूप से महत्त्वपूर्ण तो हैं पर उनकी कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
क्या है वेटलैंड
नमी या दलदली भूमि वाले क्षेत्र वेटलैंड (आर्द्रभूमि) कहे जाते हैं। यहां पूरे वर्ष आंशिक या पूर्ण रूप से पानी भरा रहता है। आर्द्रभूमि जल को प्रदूषण से मुक्त बनाती है साथ ही विभिन्न जीवों और पौधों का घर भी है। विश्व के 40% पौधों एवं जीवों की प्रजातियां आर्द्रभूमि में रहती हैं। इसके अलावा वेटलैंड जलचक्र को बनाए रखने के साथ ही वाष्पीकरण प्रक्रिया में भी भागीदारी करता है। जिससे स्थानीय स्तर पर बारिश होने में सहायता मिलती है।
जैवविविधता के लिए महत्वपूर्ण
दुनिया की कई बड़ी सभ्यताएं जलीय स्रोतों के पास हैं। आज भी वेटलैंड्स विश्व में भोजन प्रदान करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। भारत समेत विश्व के विभान्न देश में नदियों के आसपास रहने वाली जनसंख्या आर्द्रभूमि के द्वारा उपलब्ध आजीविका पर निर्भर है। वेटलैंड में मछलियां प्रमुखता से रहती हैं। इसके साथ ही धान की फसल भी इसपर निर्भर है। वहीं विभिन्न प्रकार के पक्षी अपने प्रवास और प्रजनन के लिए आर्द्रभूमि पर ही निर्भर करते हैं।
हमें क्यों हैं वेटलैंड की आवश्यकता
आर्द्रभूमि को बायोलॉजिकल सुपर-मार्केट कह सकते हैं। क्योंकि इससे ही विभन्न जीवों को पर्याप्त भोजन मिलता है। विशेषज्ञों के अनुसार वेटलैंड्स को ‘किडनीज ऑफ द लैंडस्केप’ भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि जैसे हमारे शरीर में रक्त को शुद्ध करने के साथ ही पानी का संतुलन बनाती है वैसे ही वेटलैंड भूमि पर प्रदूषण वाले अवयवों को निकालकर जल शुद्ध करती है। आर्द्रभूमि जीव-जंतु ही नहीं वनस्पतियों को भी समृद्ध करता है। विश्व में भोजन प्रदान करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
पर्यावरण सरंक्षण में मददगार
वेटलैंड्स बाढ़ के दौरान जल का अवशोषण कर लेते हैं। इसके कारण बाढ़ का पानी झीलों एवं तालाबों में एकत्रित हो जाता है और क्षेत्र जलमग्न होने से बच जाते हैं। इसके साथ ही कार्बन अवशोषण व भू जल स्तर में वृद्धि जैसी महत्त्वपूर्ण भूमिकाओं का निर्वहन भी करता है।
आर्द्रभूमि इसलिए हो रही नष्ट
तेजी से शहरीकरण, औद्योगीकरण, सड़कों, रेल मार्ग आदि निर्माण हो रहे हैं। इनके लिए जमीन की मांग बढ़ी है। इसके साथ ही कृषि कार्यों के लिए जल दोहन तेजी से हो रहा है। इसके कारण झील, नदियां, दलदल और खाड़ियां खत्म हो रही हैं। इसका सार्वाधिक खामियाजा जैवविविधता को उठाना पड़ रहा है।
रामसर कनवेंशन
दो फरवरी 1971 को दुनिया भर के वेटलैंड को सुरक्षित व संरक्षित करने के लिए ईरान के रामसर में 170 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि जुटे। यहां समझौता हुआ जिसे रामसर कन्वेंशन कहा गया। ये संधि 21 दिसंबर 1975 से लागू हुई। इसका मुख्यालय स्विटजरलैंड में है। संधि के मुताबिक इसमें ऐसे वेटलैंड का चयन किया जाता है जो जल प्रवाही हो, पशु पक्षियों का प्राकृतिक आवास हो एवं जैव विविधता की संभावनाएं हो। संरक्षण की जिम्मेदारी संबंधित राज्य एवं देश की होती है। रामसर कन्वेंशन के तहत शामिल भारतीय स्थलों को ‘अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की आर्द्रभूमि’ के रूप में अधिसूचित किया गया है। इन स्थलों को न केवल उन देशों के लिये जहां वे स्थित हैं, बल्कि समग्र मानवता के लिये महत्त्वपूर्ण माना गया है।
सबसे बड़ा खतरा
इंटरगवर्नमेंटल प्लेटफार्म ऑन बायोडाइवर्सिटी एंड इकोसिस्टमत सर्विस (आईपीबीईएस) के अनुसार 85% से अधिक आर्द्रभूमि दुनिया से गायब हो चुकी है। दुनिया में पौधों और जानवरों की 8.1 मिलियन प्रजातियां हैं। वेटलैंड सिकुड़ने से इनमें से 1 मिलियन प्रजातियों के विलुप्त होने का खतरा बना हुआ है।
विशेषज्ञों की बात
पर्यावरणविद व रांची यूनिवर्सिटी में भूविज्ञान के सहायक प्रोफेसर डॉ. नीतीश प्रियदर्शी का कहाना है कि भारत में वेटलैंड का सटीक डाटा नहीं है ऐसे में उन्हें संरक्षित करने में परेशानी होती है। पहले वेटलैंड का डाटा तैयार किया जाए। इसके अलावा शहर-गांवों का कचरा और नालों का पानी सीधे वेटलैंड में जाने से रोकने के प्रबंध किए जाएं। नए शहर बसाने से पूर्व वहां के वेटलैंड संजोने के लिए गंभीरता से योजनाएं बनें।
अवैध कब्जों पर लगे अंकुश
पर्यावरणविद अनिल साहनी ने बताया कि वेटलैंड बचाने के लिए नदियों के तटों और तालाबों पर तेजी से किए जा रहे अवैध कब्जे हटें। स्कूली स्तर पर बच्चों को आसपास के वेटलैंड दिखाकर उनका महत्व समझाया जाए। साथ ही वेटलैंड के आसपास रह रहे युवाओं को प्रशिक्षित कर वृहद स्तर पर जागरूकता अभियान चले।
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Wetland Day: 'Kidney' of Earth shrinking rapidly
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