हैप्पी बर्थडे #फोटाउ

- अनुराग शुक्ला

आइए मिलते हैं दुनिया की सबसे बूढ़ी #गोरिल्ला फोटाउ से। आप इसे किंग कांग और टारजन जैसी फिल्मों वाला गोरिल्ला न समझें। ये तो बेहद शान्त स्वभाव का शानदार जीव है। फिल्मों ने इनकी छवि खूंखार और खतरनाक जानवर की बना दी है लेकिन यह तभी आक्रामक होता है जब इसके परिवार पर कोई खतरा होता है।

फोटो इंटरनेट से साभार

बात फटोउ की। बर्लिन के चिड़याघर में रहने वाली फोटाउ ने 13 अप्रैल को अपना 65वां जन्मदिन मनाया। आप सोच रहे होंगे कि इसमें कौन सी विशेष बात है। दरअसल गोरिल्ला की औसत आयु 40 वर्ष मानी जाती है लेकिन फोटाउ पूरी दुनिया में अकेली गोरिल्ला है जो 65 वर्ष की है।

फोटो इंटरनेट से साभार

बर्लिन चिड़याघर के क्रिस्टियान आउस्ट के अनुसार फोटाउ का इतना उम्रदराज होना एक अनोखी बात है। इसीलिए उसका जन्मदिन शानदार तरीके से मनाया गया। 200 किलो के औसत वजन वाले गोरिल्ला रोजाना करीब 20 किलो घास, फल और सब्जियां खा जाते हैं। ऐसे में फोटाउ के लिए विशेष केक बनाया गया। इस चिड़याघर में पांच और गोरिल्ला हैं।
मध्य अफ्रीकी देशों में रहने वाले इस विशेष जीव का डीएनए मानवों से 99 फीसदी तक मेल खाता है। चिंपाजी और बोनोबोस के बाद गोरिल्ला मनुष्यों के निकटतम रिश्तेदार हैं। नर गोरिल्ला मादा और बच्चों के साथ करीब 12 के परिवार समूहों में रहते हैं। इनसानों की तरह ही मादा गोरिल्ला करीब नौ माह की गर्भवती होती हैं और एक समय में एक बच्चे को जन्म देती हैं।
एक वयस्क गोरिल्ला 600 किलोग्राम तक का हो सकता है। आश्चर्यजनक रूप से मनुष्यों की ही तरह गोरिल्ला के भी 32 दांत होते हैं और हाथ-पैरों में अंगूठा भी होता है।
कई अन्य जीवों की ही तरह गोरिल्ला भी खतरे में हैं। लगातार इनका प्राकृतिक आवास खत्म हो रहा है। शिकारियों की नजर भी इनपर रहती है। इनके अंगों की तस्करी भी की जाती है। इनसब के साथ ही इंसानी बीमारी मिजल्स के कारण भी इनकी संख्या में खासी गिरावट आई है।
रवांडा जैसे देशों में पर्यटन ही आय का प्रमुख श्रोत है। यहां गोरिल्ला के कारण ही दुनियाभर के पर्यटक आते हैं। जब तेजी से यहां गोरिल्ला खत्म होने लगे तब दुनियाभर के वन्यजीव विशेषज्ञों की नजर इनपर गई और इनके संरक्षण के लिए कार्य शुरू हुआ। स्थानीय लोगों की मदद से आज इनकी संख्या में कुछ सुधार हो पाया है, जो सुखद संकेत है। एक उम्मीद जगी है कि यह अद्भुत जीव फिर से अपने प्राकृतिक आवास में स्वच्छंद होकर विचरण कर सकेगा।

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