दुनिया से खत्म हो गईं पेड़-पौधों की 800 प्रजातियां


अनुराग शुक्ला 🌳🌴🌲🎄


पेड़ों की क्या आवश्यकता है, पेड़ कितने महत्वपूर्ण हैं, पेड़ों के खत्म होने से क्या फर्क पड़ रहा है, क्या हमें पता है कि दुनिया में कितने पेड़-पौधे हैं... कुछ ऐसे ही सवाल कई बार पूछे जाते हैं। मानवों की निर्भरता पेड़ों पर बहुत अधिक है। ये हमारे जीवन के लिए आवश्यक ऑक्सीजन, हवा को साफ करने, खतरनाक कार्बन के अवशोषण, पानी को स्वच्छ करने और लकड़ी की आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं।



हाल ही में किए गए वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार पृथ्वी पर करीब 73,000 पेड़ों की प्रजातियां हैं। इनमें से लगभग 9,200 प्रजातियां अभी भी खोजी जानी हैं। हालांकि दावा यह है कि यह संख्या कई गुना अधिक हो सकती है। ‘नेचर’ जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में अभी 30 खरब 40 अरब पेड़ हैं। पूरी दुनिया में हर साल 15 अरब पेड़ काटे जा रहे हैं। यह आंकड़ा विश्व की कुल आबादी आठ अरब के दोगुने के आसपास है।

इन अध्ययनों के साथ ही अब एक नया अध्ययन सामने आया है। इंग्लैंड के रॉयल बॉटेनिक गार्डेन्स के वैज्ञानिकों का दावा है कि 18वीं सदी से अब तक दुनिया से पेड़-पौधों की 800 प्रजातियां खत्म हो चुकी हैं। इतना ही नहीं हजारों प्रजातियां ऐसी स्थिति में हैं कि वो पर्यावरण में कोई योगदान नही नहीं दे रही हैं। चिंताजनक यह भी है कि कुछ प्रजातियां प्रजनन भी नहीं कर पा रहीं जिससे कारण वे दुर्लभ हो गई हैं। अध्ययन के अनुसार पूर्व में कई सदियों तक वैज्ञानिकों ने महज 537 पौधों का ही डाटा जुटाया था। पर बीते 22 वर्षों में वैज्ञानिकों ने हर साल 2100 से 2600 नई प्रजातियों का कैटालॉग बनाना शुरू किया। शोधकर्ता एमीर निक लुघाधा ने कहा कि पेड़-पौधों की अब तक 800 प्रजातियां तो विलुप्त हो चुकी हैं दुनिया की बची हुई 40 फीसदी प्रजातियां भी गहरे खतरे में हैं। इसका एक मात्र कारण जंगलों की अंधाधुंध कटाई और तेजी से बढ़ता शहरीकरण है।

जरा सोचिए! यदि पेड़ नहीं होंगे तो जैव विविधता को संरक्षित कौन करेगा? गर्म होती जलवायु की समस्या को रोकने के लिए कार्बन अवशोषण कैसे हो सकेगा? नई मिट्टी के निर्माण और पोषक चक्र को बढ़ावा कैसे मिलेगा? यह खतरा सिर्फ पेड़ों तक ही सीमित नहीं है। बड़ी संख्या में जीव-जंतुओं का भी विलुप्तीकरण हो रहा है। इसके लिए पूरी तरह से इनसानी दखल और अतिनिर्भरता है। इंसान खुद को प्रकृति का हिस्सा न मानकर उसका मालिक मान बैठा है। इसके कारण संकट गहरा और डरावना है। इसके व्यापक दुष्परिणाम हम झेल रहे हैं, हम और झेलेंगे...

Comments

Popular posts from this blog

हम जीवों के लिए उपयुक्त माहौल बनाएं, जीव हमारे लिए स्वस्थ पर्यावरण बनाएंगे

शर्मीली बाघिन जिसने बरेली की बंद फैक्ट्री पर किया राज

पर्यावरण प्रहरी : पेड़ बचाने को घर का नक्शा बदल डाला